Airplane से कोई पंछी टकराये तो क्या होगा ?

Airplane से कोई पंछी टकराये तो क्या होगा ? जब आसमान में हुआ पक्षीयो से सामना !

हेलो दोस्तों, हम हाज़िर हे हवाई जहाज से जुडी एक और रोचक और मजेदार बाते आपके साथ साजा करने के लिए,तो फिर चलिए बिना वक्त गवाये सीधा मुददे की बात करते हे। यह आर्टिकल बहुत ही ज्यादा नॉलेजेबल होने वाला हे और यह आर्टिकल आपका IQ भी बढ़ाएगा, तो बने रहिये अंत तक। 

Airplane VS Birds 

आप एरोप्लेन की सवारी का आनंद उठा रहे हे, तभी अचानक आप पर कोई खतरा मंडराने लगे तो केसा रहेगा आपका सफर ? अगर में कहु की आसमान में उड़ते हुए पंछियो से आपको खतरा हे तो क्या आप मेरी बाते से सहमत होंगे ? आप कहेंगे की पंछियो भला हमें कुछ भी नहीं कर पाएंगे। 

हमारे दिमाज में ऐसा होता हे की अगर हम हवाई जहाज में बैठे हे, और कोई पंछि हमारे विमान से टकराएगा तो यह खुद ही ख़त्म हो जायेगा बल्कि हमें जरा सी भी खरोच नहीं आ सकेंगी। यह बात शायद सही भी हो सकती हे और गलत भी।  

आपको पहले यह बतादू की Airplane जब कभी आसमान में उड़ते हे तब उनकी हाइट करीब 31,000 से 38,000 फ़ीट की होती हे यानि की 5.9 माइल्स से लेकर 7. 2 माइल्स जितनी होती हे। वही पर पंछियो की उड़ान भरने की हाइट 500 से लेकर 650 फ़ीट तक की ही होती हे। 

जिसके कारण हवाई जहाज पूरी उड़ान भरने के बाद, बिच आसमान में कभी पंछियो से नहीं टकरा सकता और ना कभी पंछियो विमान से, क्योकि बिच आसमान में उड़ान के दौरान दोनों की हाइट में 30,500 फ़ीट से लेकर 37,350 फ़ीट का अंतर रहेगा ही रहेगा। इसी लिए बीच आसमान में पंछियो के कारण होने वाली दुर्घटना मुमकिन नहीं हो सकती हे। 

तभी आपके दिमाग में यह सवाल आया होगा की, जब Airplane Take-Off (टेक-ऑफ) या फिर Land (लैंड) करता हे तब क्या पंछि टकरा सकते हे ?

अगर हां, तो फिर उसका परिणाम क्या हो सकता हे ?

पूरी उड़ान के बिच आसमान में कभी पंछि विमान से टकराएंगे नहीं क्योकि दोनों की उड़ान में काफी गहरा अंतर हे, पर Take-Off (टेक-ऑफ) या फिर Land (लैंड) के समय कुछ कहा नहीं जा सकता हे। 10,000 उड़ान मे से 1 उड़ान में यह संभव होता होंगा या शायद नहीं भी होता होंगा।

लेकिन मान लीजिये 10,000 फ्लाइट मेसे भी एक फ्लाइट के साथ पंछियो को लेकर दुर्घटना घटे तो यह फ्लाइट के पैसेंजर, पक्षियों और Airlines कंपनीयो के लिए भी बहुत बड़ी दुर्घटना हे, जिसे रोकना बेहद आवश्यक हे। 


Take-Off (टेक-ऑफ) या Land (लैंड) के समय पंछियो के कारण होती दुर्घटनाओ को रोकने के तारीके :-


ऐसी घटनाये एयरपोर्ट और रन-वे पर ही होती हे, जब एक फ्लाइट उड़ान भरने के लिए कम हाइट पर होता हे तभी पंछियो के कारण दुर्धटना होती हे, और जब एक फ्लाइट एयरपोर्ट छोड़ती हे तब तक हवाई जहाज को इतनी ऊचाई मिल चुकी होती हे की वह पंछियो की रडार में ना आ पाए। 

इसका मतलब यह हुआ की जीतनी एयरपोर्ट की जगह हे,अगर उतनी जगह पंछियो से सुरक्षित की जाये तो फिर पंछियो और हवाई जहाज को कोई खतरा नहीं रहेगा, और दुर्घटनाये भी बंध हो सकती हे।  

यह भी पढ़े :- 100 Amazing Facts about Airplane in Hindi। हवाई जहाज़ के बारे में 100 रोचक तथ्य । 

नीचे दिए गए तरीको से पंछियो को Airport से और Airplane को दुर्घटना से दूर रखा जा सकता हे। 

  1. अगर Airport कोई जंगल जैसी जगह पर हो, तब पंछियो को रोकने के लिए सारे ऐसे पेड़ काट लिए जाते हे की जो फल देते हो, क्योकि पंछि उन पेड़ो पर ज्यादा आते हे की जो फल देते हे। 
  2. Airport या उसके आस पास रोज बरोज घास को काटा जाता हे, ताकि पंछियो घास के तिनखो से Airport के नज़दीक अपना घोसला ना बना सके। 
  3. Airport के आस पास के पेड़ पोधे पर ऐसे लिक्वीड का छिंटकाव किया जाता हे, जिनकी स्मेल पंछियो को पसंद नहीं आये ताकि वे उन पेड़ो से और हवाई अड्डो से दूर रहे। 
  4. Airport के स्पीकर का इस्तेमाल करके कुत्ते, बाज, गरुड़, जैसे जंगली जानवर की आवाज निकली जाती हे और कुछ हवाई अड्डे पर जंगली जानवरो को भी रखा जाता हे, ताकि उनकी आवाज से पछी जगह छोड़ दे। 
  5. कई एयरपोर्ट पर पछियो को भगा ने के लिए फालकोंन कार का इस्तेमाल किया जाता हे। उस फलकोंन कार में खतरनाक बाज़ को रखा जाता हे और उसे खास तरह की ट्रैनिंग दी जाती हे की वे कभी भी एरपोर्ट के बिच में से उड़कर नहीं आए। यह हर बार एरपोर्ट के साइड के रास्ते से उड़कर आते हे, और जब भी कभी उसका मालिक उसे बुलाने के लिए आवाज लगता हे तब वे अपने मालिक के पास आ जाते हे। बाज को ट्रेनिंग दी जाती हे की जब भी कही पंछी दिखे तो उसे खढेड कर भगा दे, और यह काम बाज़ को बहुत पसंद भी आता हे। यह टेक्निक का इस्तेमाल ज्यादातर शाम के वक्त किया जाता हे क्योकि शाम के वक्त ही पंछियो अपने घोसले की और बढ़ते हे। 
  6. हवाई अड्डे पर प्लेन के टेक-ऑफ या लैंडिंग के दौरान शॉर्ट गन का इस्तेमाल किया जाता हे, पर पंछियो को मार गिराने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें दूर भागने के लिए। 
  7. कई एरपोर्ट पर लेज़र लाइट का इस्तेमाल भी किया जाता हे। क्योकि यह लाइट से पंछी हैरान होकर भाग जाते हे और लेज़र लाइट से आस पास रहने वाले लोगो को कोई परेशानी भी नहीं होती और पछियो को ज्यादा नुकशान भी नहीं जेलना पड़ता हे। 
  8. इस लेसर टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए उसे ऑटोमेटिक किया गया हे। इस टेक्नोलॉजी को हवाई अड्डे के चारो तरफ इंस्टोल किया जाता हे, ताकि सिस्टम पंछियो को ट्रेक कर के सीधे उसके ऊपर लेज़र  लाइट डाल सके।
  9. जब कभी लगता हे की पछियो का झुंड मंडरा रहा हे तब हमारे देश (India) में  पंछियो को Airport से दूर रखने के लिए फटाके जलाये जाते हे । ताकि धुआ और फटाको की आवाज़ से पछि अपना रस्ता बदल ले।  
ऐसे ऐसे पैतरे आजमा कर पंछियो को हवाई जहाज से टकराने से दूर रखा जाता हे क्योकि तभी पछियो के कारन होने वाली दुर्घटना को टाला जा सकता हे।
 
जब आसमान में हुआ पंछियो से सामना तब प्लेन और पंछी, दोनों को खतरा रहता हे। पैसेंजर और पंछी दोनों की जान बचाने के लिए हमें ऐसे पैतरे आज़माने पड़ते हे। 

इस आर्टिकल लिखते ही मुझे पता चला की हमने पंछियो की आज़ादी,घर,खाना,और साथ ही साथ उन लोगो का जीना हराम कर दिया हे। Technology और नवीनीकरण की आड़ में हम प्रकृति को नष्ट करने लगे हे। 

'' अगर हमें उड़ना हे तो, उड़ने वालो के पर काट कर उसे गिराना पड़ेंगा, तभी हम उड़ पाएंगे ''. 

आज की हमारी सोच यह हो चली हे। कहते हे ना की सिक्के के दो पहेलू देख कर चलना चाहिए ! अगर हम पंछियो को हवाई अड्डों के आस पास उड़ने देंगे तो उनकी जान का खतरा बना रहेगा, और यह भी उनके लिए बुरा होंगा। इसी लिए हमारी मजबूर यह हो चली हे की हम चाहकर भी उसे हवाई अड्डों के नज़दीक नहीं आने दे सकते। तभी पछियो सुरक्षित रहेंगे।   

|| धन्यवाद ||

यह भी पढ़े : - 



एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने